नवाज शरीफ की बर्खास्तगी के बाद भारतीय सोशल मीडिया पर फिर छाया पनामा पेपर।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पद से हटाए जाने के बाद एक बार फिर पनामा पेपर्स लीक मामला चर्चा में है। इस केस में नवाज शरीफ के अलावा रूस के प्रधानमंत्री ब्लामिदीर पुतिन,आइसलैंड के प्रधानमंत्री सिगमुंदुर डेविड गुनलाउगसन,अभिनेता जैकी चैन, पाकिस्तान की दिवगंत प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो सहित भारत के 500 लोगों के नाम भी शामिल थे।
पनामा पेपर्स पनामा की एक कंपनी मोसेक फोनसेका द्वारा इकट्ठा किया हुआ 1 करोड़ 15 लाख गुप्त फाइलों का भंडार है। इनमें कुल 2,14,000 कंपनियों से सम्बन्धित जानकारिया है। इसमें उस कंपनी के निर्देशक आदि की जानकारी भी है। जांच में जो डेटा सामने आया वह 1977 से लेकर 2015 तक लगभग 40 वर्षों का है। यह अब तक पाँच देशों के नेताओं के बारे में बता चुका है, जिसमें अर्जेंटीना, आइसलैंड, सऊदी अरब, यूक्रेन, सयुंक्त अरब अमिरत है। इसके अलावा यह 40 देशों के सरकार से जुड़े आदि लोगों के बारे में भी बता चुका है, इसमें ब्राज़ील, चीन, पेरु, फ्रांस, भारत, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, सीरिया और ब्रिटेन है।

भारत में क्यों चर्चा में है पनामा पेपर

सोशल मीडिया पर लोगोंं का कहना है कि जब पाकिस्तान जैसे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई हो सकती है तो भारत में अब तक मोदी सरकार ने इस पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया जबकि पेपर्स लीक मामले में पिछले साल जांच समिति भी बैठाई गई थी, लेकिन अब तक इसकी रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी है। इसके चलते सोशल मीडिया पर मोदी सरकार पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं की कहीं सरकार उन लोगो को बचाने का प्रयास तो नहीं कर रही है ?

भारत के लगभग ५०० लोगो के नाम इनमे शामिल पाए गए हैं
अभिनेता अमिताभ बच्चन
अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन
अभिनेता अजय देवगन
गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी
पश्चिम बंगाल से नेता शिशिर बजोरिया
दिल्ली लोकसत्ता पार्टी के पूर्व नेता अनुराग केजरीवाल
छत्तीसगढ़ सीएम के रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह
इंडियाबुल्स के समीर गहलोत
अरबपति सायरस पूनावाला के भाई जावेरे पूनावाला
पूर्व विधायक अनिल वासुदेव सालगाउकर
डीएलएफ के कुशल पाल सिंह और नौ परिवार के सदस्य
मेहरासंस ज्वैलर्स अश्वनी कुमार मेहरा और परिवार के सदस्य
वरिष्ठ पत्रकार करण थापर
अपोलो ग्रुप के चेयरमैन ओंकार कंवर
वकील और भारत के सॉलिसिटर जनरल रह चुके हरीष साल्वे
आदि प्रमुख नाम हैं।

क्यों रखे जाते हैं ऐसे देशों में खाते ?
इन खातों का उपयोग पैसे को देश के बैंकिंग सिस्टम की नजर से बचाकर बाहर ले जाने और टैक्स अथॉरिटीज़ की नज़र से बचाकर टैक्स सेविंग के लिए किया जाता है। इनका मकसद कई तरह के वित्तीय और कानूनी लाभों को लेना होता है। ये विदेशी खाते अधिकतर ऐसे देशों में रखे जाते हैं, जिन्हें ‘टैक्स हैवेन’ माना जाता है जिनमें पैसा रखने वाले से कोई पूछताछ नहीं होती।

 

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